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प्राचीन भारतीय और पुरातत्व इतिहास >> बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास

सरल प्रश्नोत्तर समूह

प्रकाशक : सरल प्रश्नोत्तर सीरीज प्रकाशित वर्ष : 2023
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 2794
आईएसबीएन :0

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बीए सेमेस्टर-5 पेपर-2 प्राचीन भारतीय इतिहास - सरल प्रश्नोत्तर

प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों के महत्व की विवेचना कीजिए।

अथवा
प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में सिक्कों का महत्व बताइए।

उत्तर-

प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में सिक्कों का महत्वपूर्ण योगदान है। वास्तव में ये सिक्के अभिलेखों से भी महत्वपूर्ण है। सिक्कों का क्षेत्र यद्यपि निर्मित है, फिर भी इनमें अतिशयोक्ति की गुंजाइश कम रहती है। भारत के प्राचीनतम सिक्के जो अब तक कम संख्या में मिले है, आहत सिक्के हैं। इन्हें पंचमार्क क्वायन्स के नाम से जाना जाता है। इन सिक्कों को राजा की आज्ञा से श्रेणियों या स्वर्णकार तैयार करते थे। मौर्यो के समय शासकों ने मुद्रा प्रणाली अपने हाथों में ले ली। अब ये सिक्कें राजकीय टकसाल में लक्षणाध्यक्ष की देख रेख में ढाले जाने लगे। मौर्यों के पतन के बाद गणराज्यों को पुनः आगे बढ़ने का अवसर मिला और मालव, आर्जुनायक यौधेय, कुणिन्द आदि ने अच्छी तरह से सिक्के चलवाये। इस प्रकार ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से ऐसे बहुत से सिक्के मिलने लगते है तथा यह क्रम आगे आने वाली सातियों में लगभग जारी रहा। ईसापूर्व दूसरी शताब्दी से लेकर ग्यारहवीं शताब्दी तक इतिहास के विविध पक्षों को उद्घाटित करने में इनसे बड़ी सहायता मिलती है।

द्वितीय शती ई. पूर्व से लकर तीसरी शती ई. तक के इतिहास- निर्माण के साधन तो एक मात्र यही सिक्के है। शकों के उत्तराधिकार क्रय तथा शासनकाल के निर्धारण के आधार एकमात्र सिक्के है। चन्द्रगुप्त द्वितीय, जिसने शकों के अनुकरण पर चाँदी के सिक्कों का प्रचलन कराया, से उसकी शक- विजय तथा उसकी तिथि का ज्ञान होता है। इस प्रकार सिक्कों की सहायता से अनेक विवादग्रस्त तथ्यों का निराकरण आसानी से कर सकते हैं। प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों की उपादेयता निम्न प्रकार से आंकी जा सकती है

(a) शासकों की क्रमबद्धता का ज्ञान - 'प्रयाग प्रशस्ति' किसी वंश में कितने शासक हुए, इसका पता कभी-कभी सिक्कों से आसानी से लग जाता है, क्योंकि एक ही राज्य वंश के सिक्कों में प्रायः एक रूपता दिखती है। सिक्कों के आधार पर ही कौशाम्बी के नौ राजाओं के विषय में जानकारी प्राप्त हुई। इस सम्बन्ध में डा. जे.सी. ब्राउन का अभिमत है कि -

"These coins are of the greatest service as they have preserved not only the names and title of the king who otherwise have left no other traces but also by their aid it is possible to reconstruct the dynastic lists and to determine the chronology of rulling powers.

(b) शासकों की धार्मिक अभिरुचियों का ज्ञान - 'प्रयाग प्रशस्ति' किसी शासक की धार्मिक अभिरुचि क्या थी, इसका ज्ञान सिक्कों से आसानी से ज्ञात हो जाता है। उत्तरी-पश्चिमी तथा दक्षिणी-पश्चिमी भारत के शैव मत के प्रचार-प्रसार का समर्थन सिक्कों पर अंकित शिव प्रतीकों, नन्दी तथा त्रिशूल से मिलता है। यूनानी राजाओं के सिक्कों पर वैसे तो यूनानी देवी - देवताओं की मूर्तियाँ मिलती है, पर कभी-कभी भरतीय देवताओं के प्रतीक भी मिल जाते है। जैसे अपलदलस को सिक्कों पर नन्दी की मूर्ति मिली है। कुषाण शासक विम कैडफिसस के सिक्कों पर नन्दी के साथ शिव की आकृति मिल जाती है। इस पर खरोष्ठ महरजस राजाधिरजस सर्वलोक ईश्वरस्य महीश्वरस्य वीमकदफिसस' लेख अंकित है मध्य भारत के पद्मावती के नाम शासकों के सिक्कों पर शिव वाहन की आकृति मिलती है। गुप्तों के सिक्कों पर गरुड़ध्वज की आकृति तथा 'परमभागवत' उपाधि से पता चलता है कि वे वैष्णव मतावलम्बी थे। हर्ष शैव था, इसकी पुष्टि फर्रुखाबाद से प्राप्त हर्ष की एकमात्र सुवर्ण मुद्रा से हो जाती है। जिसके पृष्ठभाग पर आरूढ़ शिव-पार्वती की आकृति मिलती है।

(c) साम्राज्य सीमा का ज्ञान - 'प्रयाग प्रशस्ति' सिक्कों से साम्राज्य-सीमा का भी ज्ञान होता है। मुद्राओं की प्राप्ति स्थल के आधार पर सम्बन्धित शासक की साम्राज्य सीमाओं का ज्ञान प्राप्त होता है। जहाँ से अधिक संख्या में मुद्राओं के ढेर मिले है, वे स्थल प्रचलनकर्ता राज्य की सीमा को संकेत करते है। यद्यपि व्यापारिक उद्देश्य से और यात्रियों के द्वारा भी सिक्के इधर-उधर राज्य सीमा के बाहर ले जाये गये प्रतीत हाते है, इसलिए मुद्राओं की प्राप्ति स्थल के आधार पर राज्य सीमा निर्धारित करते समय सावधानी अपेक्षित होती है। कनिष्क की मुद्राओं की प्राप्ति स्थल के आधार पर उसका साम्राज्य विस्तार उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, देवरिया, बलिया तथा बिहार के पटना जिला तक विस्तृत बताया जाता है। चन्द्रगुप्त द्वितीय की रजत गुद्राएँ जो शकों के अनुकरण पर निर्मित करायी गयी तथा पश्चिमी भारत में प्रचलित करायी गयी थीं। उससे शक, कुषाण, हिन्द-यवन, आदि अन्यान्य शासकों के प्राप्ति-स्थल के आधार पर राज्य-सीमा निर्धारण में सहायता मिलती हैं।

(d) आर्थिक स्थिति का ज्ञान - 'मुद्राओं के आधार पर आर्थिक स्थिति का भी ज्ञान प्राप्त होता है। मुद्राओं में मिलावट (धातु मिश्रण) को देखकर तत्कालीन सिक्कों के खोटेपन का परिचय मिलता है यदि किसी राजा के सिक्के एक ही धातु के पहले अधिक वजन के और बाद में हल्के वजन के बनने लगे या स्वर्ण की जगह रजत या ताम्र के निर्मित होने लगे, तो इस आधार उस काल की आर्थिक स्थिति का ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इण्डोसीथियन नरेशों की रजत मुद्राओं की तुरन्त समाप्ति से उनकी आर्थिक स्थिति के अन्तर का ज्ञान होता है।

गुप्तकालीन नरेश स्कन्दगुप्त की मुद्राएँ सम्मिलित, स्वर्ण की मिलती है। ऐसा प्रतीत होता है कि विदेशी आक्रमणकारियों के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गयी थी। दक्षिण भारत में स्वर्ण एवं चांदी के रोमन सिक्के पाये गये हैं, जिनसे पता चलाता है कि भारत का रोम के साथ व्यापारिक सम्बन्ध था। स्कन्दगुप्त के शासनकाल तक गुप्त शासकों द्वारा स्वर्ण मुद्राओं का प्रचलन यह संकेत करता है कि उस समय बिहार के स्वर्ण खानों का उपयोग निर्बाध रूप से किया जा रहा था। यह गुप्त शासकों की सम्पन्नता का परिचायक है। परवर्ती गुप्तों द्वारा ताम्र सिक्कों का प्रचलन उनकी दयनीय आर्थिक स्थिति का धोतक है। डा. रमेशचन्द्र मजूमदार का कहना सत्य प्रतीत होता है। कि " The importance of numismatics for the study of the economic condition of a country is too need a detailed consideration."

(e) तत्कालीन शासन पद्वति का ज्ञान - 'प्रयाग प्रशस्ति' सिक्कों से तत्कालीन शासन पद्वति का भी ज्ञान प्राप्त होता है। बोनान नामक शासन के सिक्कों पर महाराज भ्रातस श्पलहोरस' लेख मिलता है तथा दूसरे पर श्पलहोर पुत्रस धमिअस श्पलदास' लेख है। इससे स्पष्ट होता है कि श्लोपहार पहले बोनान के साथ सहायक शासक था, पर बाद में स्वतंत्र होकर अपने पुत्र के साथ शासन करने लगा।

(f) तत्कालीन जनजीवन का ज्ञान - 'प्रयाग प्रशस्ति' तत्कालीन जन-जीवन की भी जानकारी सिक्कों से प्राप्त होती है। सिक्कों से ही समुद्रगुप्त तथा कुमारगुप्त के अश्वमेघ यज्ञ का पता चलता है। कुमार देवी प्रकार के सिक्कों पर कभी-कभी शासक को वीणा बजाते हुए प्रदर्शित किया गया है, जो उसकी संगीत प्रियता का प्रमाण है। कभी-कभी सिंह का शिकार करते हुए तथा घोड़े की सवारी करते हुए दिखाया गया है। इससे उन शासकों की व्यक्तिगत अभिरूचि एवं सिक्कों पर नाव का चित्र इस तथ्य का परिचायक है कि आन्ध्र शासकों ने समुद्र पर विजय प्राप्त कर इन सिक्कों का प्रचलन किया था।

(g) कला के प्रतीक - 'प्रयाग प्रशस्ति' सिक्के कला के प्रतीक है। सिक्कों को सुडौल एवं बैडोल आकृति उस पर बने राजा या देवी-देवताओं की आकृतियां तत्कालीन कला की उत्कृष्टता सामान्य अवस्था या अवनत अवस्था का परिचय देते है। सिक्कों पर अंकित लेख चित्र तत्कालीन साहित्य, भाषा तथा कलात्मक प्रगति का परिचय कराते है उदाहरणार्थ गुप्तकालीन सिक्कों पर शुद्ध संस्कृत भाषा में लेख मिलते है। इन सिक्कों पर कला का अच्छा प्रदर्शन किया गया है।

(b) तिथि निर्धारण में सहायक - 'प्रयाग प्रशस्ति' विभिन्न शासकों द्वारा प्रचलित सम्वत् की तिथियाँ उन शासकों की मुद्राओं पर मिलती है जैसे शक तथा कुषाण राजाओं को मुद्राओं पर शक सम्वत् की तिथियाँ तथा गुप्त मुद्राओं पर गुप्त सम्वत् की तिथियाँ अंकित मिलती है। विभिन्न साक्ष्यों के अनुशीलन से यह पता चलता है कि शक सम्वत् 78 ई. तथा गुप्त सम्वत् 319-20 ई. में प्रारम्भ हुआ। इस प्रकार मुद्राओं से तिथिगत जानकारी में पर्याप्त सहायता मिलती है।

अन्ततः जे. सी. ब्राउन का कथन - 'प्रयाग प्रशस्ति' सत्य प्रतीत होता है कि "इन सिक्कों ने इतिहास की बहुत सेवा की है, क्योंकि उन्होने उन राजाओं के नाम तथा उपाधियों को सुरक्षित रखा है। इसको सहायता से इतिहास में पर्याप्त सहायता मिली है।'

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न- पुरातत्व क्या है? इसकी विषय-वस्तु का निरूपण कीजिए।
  2. प्रश्न- पुरातत्व का मानविकी तथा अन्य विज्ञानों से सम्बन्ध स्पष्ट कीजिए।
  3. प्रश्न- पुरातत्व विज्ञान के स्वरूप या प्रकृति पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  4. प्रश्न- 'पुरातत्व के अभाव में इतिहास अपंग है। इस कथन को समझाइए।
  5. प्रश्न- इतिहास का पुरातत्व शस्त्र के साथ सम्बन्धों की विवेचना कीजिए।
  6. प्रश्न- भारत में पुरातत्व पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  7. प्रश्न- पुरातत्व सामग्री के क्षेत्रों का विश्लेषण अध्ययन कीजिये।
  8. प्रश्न- भारत के पुरातत्व के ह्रास होने के क्या कारण हैं?
  9. प्रश्न- प्राचीन इतिहास की संरचना में पुरातात्विक स्रोतों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  10. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में पुरातत्व का महत्व बताइए।
  11. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  12. प्रश्न- स्तम्भ लेख के विषय में आप क्या जानते हैं?
  13. प्रश्न- स्मारकों से प्राचीन भारतीय इतिहास की क्या जानकारी प्रात होती है?
  14. प्रश्न- पुरातत्व के उद्देश्यों से अवगत कराइये।
  15. प्रश्न- पुरातत्व के विकास के विषय में बताइये।
  16. प्रश्न- पुरातात्विक विज्ञान के विषय में बताइये।
  17. प्रश्न- ऑगस्टस पिट, विलियम फ्लिंडर्स पेट्री व सर मोर्टिमर व्हीलर के विषय में बताइये।
  18. प्रश्न- उत्खनन के विभिन्न सिद्धान्तों तथा प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
  19. प्रश्न- पुरातत्व में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज उत्खननों के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  20. प्रश्न- डेटिंग मुख्य रूप से उत्खनन के बाद की जाती है, क्यों। कारणों का उल्लेख कीजिए।
  21. प्रश्न- डेटिंग (Dating) क्या है? विस्तृत रूप से बताइये।
  22. प्रश्न- कार्बन-14 की सीमाओं को बताइये।
  23. प्रश्न- उत्खनन व विश्लेषण (पुरातत्व के अंग) के विषय में बताइये।
  24. प्रश्न- रिमोट सेंसिंग, Lidar लेजर अल्टीमीटर के विषय में बताइये।
  25. प्रश्न- लम्बवत् और क्षैतिज उत्खनन में पारस्परिक सम्बन्धों को निरूपित कीजिए।
  26. प्रश्न- क्षैतिज उत्खनन के लाभों एवं हानियों पर प्रकाश डालिए।
  27. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  28. प्रश्न- निम्न पुरापाषाण कालीन संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  29. प्रश्न- उत्तर पुरापाषाण कालीन संस्कृति के विकास का वर्णन कीजिए।
  30. प्रश्न- भारत की मध्यपाषाणिक संस्कृति पर एक वृहद लेख लिखिए।
  31. प्रश्न- मध्यपाषाण काल की संस्कृति का महत्व पूर्ववर्ती संस्कृतियों से अधिक है? विस्तृत विवेचन कीजिए।
  32. प्रश्न- भारत में नवपाषाण कालीन संस्कृति के विस्तार का वर्णन कीजिये।
  33. प्रश्न- भारतीय पाषाणिक संस्कृति को कितने कालों में विभाजित किया गया है?
  34. प्रश्न- पुरापाषाण काल पर एक लघु लेख लिखिए।
  35. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन मृद्भाण्डों पर टिप्पणी लिखिए।
  36. प्रश्न- पूर्व पाषाण काल के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  37. प्रश्न- पुरापाषाण कालीन शवाशेष पद्धति पर टिप्पणी लिखिए।
  38. प्रश्न- मध्यपाषाण काल से आप क्या समझते हैं?
  39. प्रश्न- मध्यपाषाण कालीन संस्कृति की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।।
  40. प्रश्न- मध्यपाषाणकालीन संस्कृति का विस्तार या प्रसार क्षेत्र स्पष्ट कीजिए।
  41. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र के मध्यपाषाणिक उपकरणों पर प्रकाश डालिए।
  42. प्रश्न- गंगा घाटी की मध्यपाषाण कालीन संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  43. प्रश्न- नवपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिये।
  44. प्रश्न- विन्ध्य क्षेत्र की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  45. प्रश्न- दक्षिण भारत की नवपाषाण कालीन संस्कृति के विषय में बताइए।
  46. प्रश्न- मध्य गंगा घाटी की नवपाषाण कालीन संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  47. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति से आप क्या समझते हैं? भारत में इसके विस्तार का उल्लेख कीजिए।
  48. प्रश्न- जोर्वे-ताम्रपाषाणिक संस्कृति की विशेषताओं की विवेचना कीजिए।
  49. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति का विस्तार से वर्णन कीजिए।
  50. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  51. प्रश्न- आहार संस्कृति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  52. प्रश्न- मालवा की ताम्रपाषाणिक संस्कृति पर प्रकाश डालिए।
  53. प्रश्न- जोर्वे संस्कृति की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
  54. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के औजार क्या थे?
  55. प्रश्न- ताम्रपाषाणिक संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालिए।
  56. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता के नामकरण और उसके भौगोलिक विस्तार की विवेचना कीजिए।
  57. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता की नगर योजना का विस्तृत वर्णन कीजिए।
  58. प्रश्न- हड़प्पा सभ्यता के नगरों के नगर- विन्यास पर विस्तृत टिप्पणी लिखिए।
  59. प्रश्न- सिन्धु घाटी के लोगों की शारीरिक विशेषताओं का संक्षिप्त मूल्यांकन कीजिए।
  60. प्रश्न- पाषाण प्रौद्योगिकी पर टिप्पणी लिखिए।
  61. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के सामाजिक संगठन पर टिप्पणी कीजिए।
  62. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के कला और धर्म पर टिप्पणी कीजिए।
  63. प्रश्न- सिंधु सभ्यता के व्यापार का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
  64. प्रश्न- सिंधु सभ्यता की लिपि पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
  65. प्रश्न- सिन्धु सभ्यता के पतन के कारणों पर प्रकाश डालिए।
  66. प्रश्न- लौह उत्पत्ति के सम्बन्ध में पुरैतिहासिक व ऐतिहासिक काल के विचारों से अवगत कराइये?
  67. प्रश्न- लोहे की उत्पत्ति (भारत में) के विषय में विभिन्न चर्चाओं से अवगत कराइये।
  68. प्रश्न- "ताम्र की अपेक्षा, लोहे की महत्ता उसकी कठोरता न होकर उसकी प्रचुरता में है" कथन को समझाइये।
  69. प्रश्न- महापाषाण संस्कृति के विषय में आप क्या जानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
  70. प्रश्न- लौह युग की भारत में प्राचीनता से अवगत कराइये।
  71. प्रश्न- बलूचिस्तान में लौह की उत्पत्ति से सम्बन्धित मतों से अवगत कराइये?
  72. प्रश्न- भारत में लौह-प्रयोक्ता संस्कृति पर टिप्पणी लिखिए।
  73. प्रश्न- प्राचीन मृद्भाण्ड परम्परा से आप क्या समझते हैं? गैरिक मृद्भाण्ड (OCP) संस्कृति का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  74. प्रश्न- चित्रित धूसर मृद्भाण्ड (PGW) के विषय में विस्तार से समझाइए।
  75. प्रश्न- उत्तरी काले चमकदार मृद्भाण्ड (NBPW) के विषय में संक्षेप में बताइए।
  76. प्रश्न- एन. बी. पी. मृद्भाण्ड संस्कृति का कालानुक्रम बताइए।
  77. प्रश्न- मालवा की मृद्भाण्ड परम्परा के विषय में बताइए।
  78. प्रश्न- पी. जी. डब्ल्यू. मृद्भाण्ड के विषय में एक लघु लेख लिखिये।
  79. प्रश्न- प्राचीन भारत में प्रयुक्त लिपियों के प्रकार तथा नाम बताइए।
  80. प्रश्न- मौर्यकालीन ब्राह्मी लिपि पर प्रकाश डालिए।
  81. प्रश्न- प्राचीन भारत की प्रमुख खरोष्ठी तथा ब्राह्मी लिपियों पर प्रकाश डालिए।
  82. प्रश्न- अक्षरों की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
  83. प्रश्न- अशोक के अभिलेख की लिपि बताइए।
  84. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास की संरचना में अभिलेखों के महत्व का उल्लेख कीजिए।
  85. प्रश्न- अभिलेख किसे कहते हैं? और प्रालेख से किस प्रकार भिन्न हैं?
  86. प्रश्न- प्राचीन भारतीय अभिलेखों से सामाजिक जीवन पर क्या प्रकाश पड़ता है?
  87. प्रश्न- अशोक के स्तम्भ लेखों के विषय में बताइये।
  88. प्रश्न- अशोक के रूमेन्देई स्तम्भ लेख का सार बताइए।
  89. प्रश्न- अभिलेख के प्रकार बताइए।
  90. प्रश्न- समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति के विषय में बताइए।
  91. प्रश्न- जूनागढ़ अभिलेख से किस राजा के विषय में जानकारी मिलती है उसके विषय में आप सूक्ष्म में बताइए।
  92. प्रश्न- मुद्रा बनाने की रीतियों का उल्लेख करते हुए उनकी वैज्ञानिकता को सिद्ध कीजिए।
  93. प्रश्न- भारत में मुद्रा की प्राचीनता पर प्रकाश डालिए।
  94. प्रश्न- प्राचीन भारत में मुद्रा निर्माण की साँचा विधि का वर्णन कीजिए।
  95. प्रश्न- मुद्रा निर्माण की ठप्पा विधि का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  96. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्कों) की मुख्य विशेषताओं एवं तिथिक्रम का वर्णन कीजिए।
  97. प्रश्न- मौर्यकालीन सिक्कों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत कीजिए।
  98. प्रश्न- आहत मुद्राओं (पंचमार्क सिक्के) से आप क्या समझते हैं?
  99. प्रश्न- आहत सिक्कों के प्रकार बताइये।
  100. प्रश्न- पंचमार्क सिक्कों का महत्व बताइए।
  101. प्रश्न- कुषाणकालीन सिक्कों के इतिहास का विस्तृत विवेचन कीजिए।
  102. प्रश्न- भारतीय यूनानी सिक्कों की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
  103. प्रश्न- कुषाण कालीन सिक्कों के उद्भव एवं प्राचीनता को संक्षेप में बताइए।
  104. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का परिचय दीजिए।
  105. प्रश्न- गुप्तकालीन ताम्र सिक्कों पर टिप्पणी लिखिए।
  106. प्रश्न- उत्तर गुप्तकालीन मुद्रा का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  107. प्रश्न- समुद्रगुप्त के स्वर्ण सिक्कों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
  108. प्रश्न- गुप्त सिक्कों की बनावट पर टिप्पणी लिखिए।
  109. प्रश्न- गुप्तकालीन सिक्कों का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
  110. प्रश्न- इतिहास के अध्ययन हेतु अभिलेख अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। विवेचना कीजिए।
  111. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में सिक्कों के महत्व की विवेचना कीजिए।
  112. प्रश्न- प्राचीन सिक्कों से शासकों की धार्मिक अभिरुचियों का ज्ञान किस प्रकार प्राप्त होता है?
  113. प्रश्न- हड़प्पा की मुद्राओं के महत्व का मूल्यांकन कीजिए।
  114. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के अध्ययन में अभिलेखों का क्या महत्व है?
  115. प्रश्न- प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत के रूप में सिक्कों का महत्व बताइए।

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